मंगलवार, 30 जुलाई 2013
हे देश के वीर जवानों उठो और आगे बढ़ो. भारत माँ है पुकार है रही.
देश की अस्मिता हो रही है जार जार, भारत माँ है पुकार रही बार-बार.
सत्ता को लो अपने हाथो में, न आओ इनकी बातो में.
इनको है अपने वोट से मतलब, देश की कहाँ परवाह इन्हें. इन्हें तो है सिर्फ नोट से मतलब.
मच रही घमासान इस देश में फिर आ पहुंचा रावन साधू के वेश में.
हरने आया माँ की अस्मिता, जनता है पसोपेश में.
फिर से भारत माँ है पुकार रही, जनता त्राहि माम्-त्राहि माम् चिल्ला रही.
देश में दु:शासन कर रहा है चीरहरण, उखाड़ दो इनके हाथ फिर न कर पाए चीरहरण.
अंधे धृतराष्ट्र है मंद-मंद मुस्कुरा रहा, शकुनि अपनी कुटिल चाल है चल रहा.
जयचंदों ने फिर से देश को बेचा है, जिसको देश के सपूतो ने अपने खून से सींचा है.
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